भारत में डिटेंशन सेंटर और उसके विविध पहलू भाग -2


गरिमा सिंह निदेशक सामाजिक संस्था आँखे और डिप्टी एडिटर अर्थव्यवस्था परिदृश्य आज और कल 


डिटेंशन सेंटर के बारे में 1998 से जारी हो रहें दिशा-निर्देश -


डिटेंशन सेंटर में रह कर निष्कासन का इंतजार कर रहे इन विदेशी नागरिकों के लिए गृह मंत्रालय ने जुलाई 1998 से राज्य सरकारों और केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए निर्देश जारी किए है।


जिससे विदेशी नागरिकों की व्यक्तिगत उपलब्धता को सुनिश्चित किया जाए और यात्रा दस्तावेजों के तैयार होते ही उन्हें उनके देश भेज दिया जाए।


सूत्रों के अनुसार इन निर्देशों को 23 नवंबर 2009, 7 मार्च 2012, 29 अप्रैल 2014, 10 सितंबर 2014 और 7 सितंबर 2018 को दोहराया गया। 


सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश-


 28 फरवरी 2012 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद 7 मार्च 2012 को सरकार ने इस आशय का निर्देश दिया था।


सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा था कि जो विदेशी नागरिक अपनी सजा पूरी कर चुकें थे।


उसे तुरंत जेल से रिहा कर और उचित स्थान पर रखा जाए।


इसे डिटेंशन सेंटर या कुछ भी कहा जा सकता है।


ऐसे लोगों के रखे जाने वाले स्थान पर मूलभूत सुविधाओं जैसे बिजली, पानी और सफाई की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।


सुप्रीम कोर्ट ने 12 सितंबर 2018 के अपने आदेश में 10 सितंबर 2014 को गृह मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों का संज्ञान लिया।


जिसमें राज्य सरकारों को अवैध प्रवासियों या विदेशी नागरिकों की गतिविधियों को रोकने के लिए डिटेंशन या होल्डिंग सेंटर स्थापित करने के निर्देश दिए थे।


ये निर्देश उनके बारे में थे जो नागरिकता की पुष्टि न करा पाने के चलते जेल की सजा पूरी कर चुके थे। 


किसी राज्य ने नहीं किया पालन-


शीर्ष अदालत के निर्देश के बाद भी किसी भी राज्य ने इस दिशा में कोई पहल नहीं की।


कोर्ट ने असम के गोलपारा में केन्द्र सरकार द्वारा स्वीकृत डिटेंशन सेंटर की प्रगति रिपोर्ट जाननी चाही।


सरकार से उम्मीद जताई कि जल्द ही वह इस केन्द्र को तैयार करेगी।


अगली दो सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निर्माण स्थिति की समीक्षा की।


सुप्रीम कोर्ट के 20 सितंबर 2018 के निर्देशों के तहत एक आदर्श डिटेंशन सेंटर मैन्युअल तैयार किया गया और गृह मंत्रालय द्वारा नौ जनवरी 2019 को सभी राज्यों को भेजा गया।