भारतीय अर्थव्यवस्था सुधार की ओर अग्रसर
31 अगस्त 2021 को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था में वित्तीय वर्ष 2021- 22 की पहली तिमाही में अर्थात अप्रैल से लेकर जुलाई तक की अवधि में सकारात्मक वृद्धि देखने को मिली है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर 20.1% की रही हैभारतीय अर्थव्यवस्था में सुधारV आकार से हो रहाहै उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2020 21 की प्रथम तिमाही में अर्थव्यवस्था में 24.4% की गिरावट हुई थी. यद्यपि भारतीय अर्थव्यवस्था में चालू वित्तीय वर्ष पहली तिमाही में अच्छा व्यवस्था की वृद्धि दर उत्साहवर्धकहै परंतु इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था पहले की स्थिति में अभी नहीं पहुंच पाई है
 राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार वित्तीय वर्ष की प्रथम तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि दर 49.6%,निर्माण क्षेत्र में वृद्धि दर 68.3% सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 34.3% रही है कृषि क्षेत्र में भी सकारात्मक वृद्धि दिखाई है. कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 4.5% रही है. इस प्रकार राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से यह संकेत मिलता कि भारतीय अर्थव्यवस्था करो ना कि दूसरी लहर से उपजे संकट के बावजूद सुधार के पथ पर अग्रसर हो चुकी है और उसमें सुधार V आकार से हो रहाहै.  यह भविष्य के लिए एक अच्छा संकेत है परंतु हमें आत्मविश्वास में आकरके निश्चिंत भी नहीं होनाहै 
 भारतीय अर्थव्यवस्था में विकास की गति को और अधिक तेज करने तथा वर्तमान स्तर को बनाए रखने के लिए निवेश को बढ़ावा देना होगा. लघु एवं मध्यम उद्यमियों को प्रोत्साहित करना होगा. के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना होगाकि उपभोक्ता भर के आय में वृद्धि क्योंकि वह अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है. तारिक स्तर पर देखने को मिल रहा है कि वर्तमान में मध्यम वर्ग अपने उपभोग ने लगातार कटौती कर रहाहै क्योंकि उसकी आय कम हो चुकी है और वह जीविकोपार्जन के लिए संघर्ष कर रहाहै.  सरकार को एक सामाजिक बेल आउट पैकेज देकर के अव्यवस्था को गतिशील बनाने की आवश्यकताहै.  सरकार मध्यम वर्ग को उसके बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, उसके ऋण संबंधी दायित्वों को पूरा करने के लिए, अन्य आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए व्यक्तिगत ऋण आरती दर पर दीर्घकालीन परिपेक्ष में उदार शर्तों पर और सरलता के साथ अब तक कराया जाना चाहिए. इससे अर्थव्यवस्था में पादन को बढ़ावा मिलेगा, के उपभोग बढेगा.  की मांग और आवश्यकताहै  कि किसी भी प्रकार मांग में वृद्धि करके व्यवस्था को गतिशील बनाया जाए. यह सामाजिक क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश को बढ़ाकर किया जा सकता है.