वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था सुधार के पथ पर अग्रसर है परंतु कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को मूर्त रूप देने के कारण तथा अनेक राज्यों में चुनाव होने के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव भी बढ़ेगा विगत 2 वर्षों से कोरोना के कारण उत्पन्न परिस्थितियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था में राज्य वित्त की भूमिका को बढ़ा दिया जिसके कारण राजकोषीय दबाव बढ़ता जा रहा है.
भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया सकारात्मक रहेगी
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक समिति के सदस्य प्रसिद्ध अर्थशास्त्री आशिमा गोयल पीटीआई को दिए गए साक्षात्कार में यह स्पष्ट तौर से कहा है कि चालू वित्तीय वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था में सकारात्मक सुधार की प्रवृत्ति जारी रहेगी और चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक विकास दर 9.5% के आसपास रहेगी. आशिमा गोयल के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष में राजकोषीय एवं मौद्रिक क्षेत्र में समन्वय बना रहेगा आशिमा गोयल के अनुसार निवेश के बढ़ने से सकारात्मक परिवर्तन प्रवृत्ति यथावत बनी रहे. आशिमा गोयल का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के बयान से मिलता जुलता है राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार भी वर्ष 2000 में भारत के आर्थिक विकास दर 9% के आसपास बनी रहेगी. परंतु भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रहेगा